
By – राजेश खण्डेलवाल
6 February 2025
परम्परागत खेती के बजाए आप भी हरी मिर्च की खेती (Green Chilli Cultivation) करके लाखों रुपए साल कमा सकते हैं। भरतपुर के बुराना गांव के किसानों को हरी मिर्च की खेती (Green Chilli Cultivation) ने लखपति बना दिया है। अब यहां से मजदूरी के लिए युवाओं का होने वाला पलायन भी थम गया है। फिलहाल गांव में 80 फीसदी किसान हरी मिर्च की खेती (Green Chilli Cultivation) करते हैं। बुराना गांव को अब ग्रामीण हरी मिर्च वाला गांव कहने लगे हैं। पहले यहां के ग्रामीण खेती-बाड़ी छोडकऱ मजदूरी के लिए दूसरे शहरों में जाते थे और गेहूं-सरसों की परंपरागत खेती की जाती थी। एक दशक पहले एक किसान ने हरी मिर्च पैदा की और अच्छा मुनाफा कमाया तो अन्य किसान भी प्रेरित हुए।

हरी मिर्च की खेती ने बदली बुराना की तस्वीर व तकदीर
भरतपुर (राजस्थान)। मैंने इस साल 3 बीघा खेत में ईगल किस्म की हरी मिर्च बोई है। पहले गेहूं और सरसों का उत्पादन करता था। कुछ साल पहले हरी मिर्च की खेती (Green Chilli Cultivation) को प्रयोग के तौर पर किया। एक बीघा खेत से एक से डेढ़ लाख रुपए का फायदा मिला तो खुशी के साथ अचंभा भी हुआ। इसके बाद मैंने हरी मिर्च की खेती (Green Chilli Cultivation) करने वाले अन्य किसानों से सही तरीका जाना और समझा। अब कई साल से हरी मिर्च की खेती कर रहा हूं। यह कहना है बुराना गांव के युवा किसान बीरम सिंह कुशवाह का।
पॉजिटिव कनेक्ट से बाचतीच में वीरम सिंह बताते हैं कि इस बार अच्छी पैदावार हुई है और गुणवत्ता भी बेहतर है। पहले गांव से युवा नौकरी और काम-धंधे की तलाश में दूरदराज के इलाकों में जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब युवा भी गांव में रहकर मिर्च की खेती कर रहे हैं। अधिक उत्पादन के कारण गांव की पहचान भी बनी है। बुराना गांव की तीखी छोटी हरी मिर्च जयपुर, दिल्ली, आगरा जैसे बड़े शहरों में जा रही है। यही कारण है कि मिर्च की खेती ने गांव की आर्थिक हालात भी सुधारे हैं।
भरतपुर जिले के रूपवास उपखण्ड के छोटे से बुराना गांव में हरी मिर्च की खेती (Green Chilli Cultivation) ने ग्रामीणों का पलायन तो थामा ही है, किसानों को लखपति भी बना दिया है। पिछले एक दशक के दौरान बुराना गांव की तस्वीर के साथ किसानों की तकदीर भी बदल गई है। आज गांव में 80 फीसदी किसान ईगल किस्म की हरी मिर्च की खेती (Green Chilli Cultivation) कर रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार पैदावार भी अच्छी हुई है। पूरा गांव सीजन में 2 करोड़ से ज्यादा की हरी मिर्च का उत्पादन करता है। यूं तो हरी मिर्च में कई तरह की वैराइटी है, लेकिन यहां का हवा-पानी तीखी छोटी मिर्च के लिए उपयुक्त है।

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9 माह तक मिलता है उत्पादन
बुराना गांव के ही एक अन्य किसान मोहन सिंह बताते हैं कि सरसों और गेहूं की खेती अब भी हो रही है। लेकिन, ज्यादातर किसान हरी मिर्च की खेती (Green Chilli Cultivation) पर ही ध्यान दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह फसल कमाई की गारंटी देती है। एक दशक में ग्रामीण जागरूक हुए हैं। पहले किसान गेहूं, बाजरा और सरसों उगाकर घाटा खाते थे। अब किसान प्रयोग भी करने लगे हैं। मिर्च के उत्पादन से मुनाफा भी मिल रहा है। खपत लायक हरी मिर्च का उत्पादन हो रहा है। उसका कहना है, मैंने प्रति बीघा एक लाख रुपए की मिर्च बेची है। इसमें 50 हजार का खर्चा हो जाता है। बाकी 50-60 हजार रुपए का शुद्ध लाभ होता है। वे चाहते हैं कि अन्य युवा किसान भी गांव में ही बच्चों के साथ रहकर हरी मिर्च की पैदावार करें।

5 बार कर लेते हैं मिर्च की तुड़ाई
ईगल किस्म के पौधे से हम साल में 5 बार तुड़ाई ले लेते हैं। मिर्च का यह सीजन सर्दी को छोडकऱ साल के 9 महीने तक चलता है। इसके लिए तापमान 30-35 डिग्री सेल्सियस के आसपास अच्छा रहता है। तेज सर्दी में मिर्च का उत्पादन नहीं होता। अप्रैल-मई में मिर्च की बंपर पैदावार होने लगती है, जो अगस्त-नवंबर तक चलती है।

इस तरह करते हैं मिर्च की खेती
मिर्च की खेती में मेहनत तो लगती है। मिर्च उगाने के लिए किसान को गर्मी के सीजन में खेत की 4 बार गहरी जुताई करनी चाहिए। इसके बाद प्रति बीघा खेत में 4 ट्रॉली देसी खाद की डालनी चाहिए। खाद डालने के बाद कम से कम 6 बार जुताई करके मेज लगानी चाहिए। इससे खाद मिट्टी में अच्छी तरह से मिक्स हो जाएगी। मिर्च की अच्छी पैदावार के लिए खेत में डीएपी, जिंक, सुपर फास्फेट, सल्फर डालकर क्यारी बनाई जाती है। इसके बाद नर्सरी से तैयार पौधों की क्यारी में रोपाई की जाती है। पौधे लगाने के बाद एक बार हल्की सिंचाई की जाती है। पौधा लगने के बाद निराई-गुड़ाई करनी होती है। जड़ के पास मिट्टी सूखने पर सिंचाई करनी होती है। लगभग 50 दिन में पौधा मिर्च का प्रोडक्शन देना शुरू कर देता है। इसके बाद लगातार पौधे पर 9 महीने तक मिर्च लगती हैं। एक पौधा 12 किलो तक मिर्च दे देता है।

फायदेमंद है हरी मिर्च
* ब्लड प्रेशर व शुगर को नियंत्रित करती है।
* संक्रमण से शरीर व त्वचा की रक्षा करती है।
* फैंफड़ों के कैंसर के खतरे को कम करती है।
* त्वचा को स्वस्थ रखती है।
* दिल के लिए फायदेमंद है।
* पाचन तंत्र मजबूत करती है।
